नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (एमएफडी) फ्रेमवर्क की तर्ज पर एक नया वितरण ढांचा प्रस्तावित किया है। इसका जोर विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के निवेशकों को इन उत्पादों तक पहुंच दिलाने पर है।प्रस्तावित ढांचे के तहत फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स (एफआईसीपी) को स्टॉक एक्सचेंजों के साथ पंजीकृत किया जाएगा और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (ओबीपीपी) द्वारा नियुक्त किया जाएगा। ये पार्टनर निवेशकों को फिक्स्ड-इनकम उत्पादों को समझने, उनमें निवेश करने और लेनदेन पूरा करने में मदद करेंगे।
सेबी ने कहा कि पिछले एक दशक में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का काफी विस्तार हुआ है। वित्त वर्ष 2014-15 के अंत में करीब 17.5 लाख करोड़ रुपए के कॉरपोरेट बॉन्ड बकाया थे, जो 31 जुलाई, 2026 तक बढ़कर 60 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गए। सूचीबद्ध कॉरपोरेट बॉन्ड करीब 46 लाख करोड़ रुपए के हैं, जो कुल बाजार का लगभग 76.6 प्रतिशत है।
हालांकि, इस वृद्धि के बावजूद कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी सीमित बनी हुई है। डेट सिक्योरिटीज तक अब भी मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों की पहुंच है।
नियामक ने कहा कि मौजूदा ओबीपीपी व्यवस्था ने सूचीबद्ध डेट सिक्योरिटीज तक खुदरा निवेशकों की पहुंच को आसान बनाया है। इसके तहत निवेशक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न उत्पादों की तुलना करने और लेनदेन पूरा करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही रिक्वेस्ट फॉर कोट (आरएफक्यू) प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों में भी तेज वृद्धि हुई है।
सेबी के अनुसार, आरएफक्यू पर ट्रेड की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में 2.76 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 17.84 लाख हो गई। यह करीब 546 प्रतिशत की वृद्धि है। नियामक ने कहा कि इस बढ़ोतरी में ओबीपीपी के माध्यम से बढ़ती खुदरा भागीदारी का बड़ा योगदान रहा।
हालांकि, सेबी ने कहा कि बड़े शहरी केंद्रों से बाहर के निवेशकों तक पहुंच बनाने में अभी भी एक संरचनात्मक कमी मौजूद है। खासकर टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत है।
नियामक ने कहा कि हितधारकों के साथ हुई चर्चाओं में छोटे शहरों में म्यूचुअल फंड के प्रति जागरूकता और उसकी पहुंच बढ़ाने में एमएफडी की भूमिका सामने आई है। प्रस्तावित एफआईसीपी ढांचा इसी वितरण मॉडल को फिक्स्ड-इनकम बाजार में लागू करने की कोशिश है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एफआईसीपी ढांचा निवेशकों को फिक्स्ड-इनकम उत्पादों की विशेषताओं और उनसे जुड़े जोखिमों को समझने, जरूरी दस्तावेज पूरे करने और लेनदेन के लिए विनियमित प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में सहायता करेंगे।
निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति और गैर-व्यक्तिगत संस्थाएं, दोनों एफआईसीपी बनने के पात्र होंगे। व्यक्तियों के लिए भारतीय नागरिक होना, कम से कम 18 वर्ष की आयु, 12वीं कक्षा पास होना और वैध एनआईएसएम-सीरीज: फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज प्रमाणपत्र सहित अन्य निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी होगा।




