भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को प्रदेशभर के शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता खत्म करने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में शिक्षक भोपाल के अंबेडकर पार्क में जुटे। शिक्षक संघर्ष समिति और वरिष्ठता बहाली मंच के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने दो टूक कह दिया है कि वे किसी भी कीमत पर TET नहीं देंगे और अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
प्रदेश के हर कोने से जुटे शिक्षक
रविवार सुबह 11 बजे से ही भोपाल के लिंक रोड नंबर-2 स्थित अंबेडकर पार्क में शिक्षकों का आना शुरू हो गया था। दोपहर 1 बजे से विधिवत धरना शुरू हुआ। इस प्रदर्शन में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, नर्मदापुरम, शहडोल, सागर और रीवा समेत प्रदेश के लगभग सभी संभागों से आए शिक्षक और शिक्षिकाएं शामिल हुए। इनकी प्रमुख मांगें TET से छूट, पहली नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता की बहाली और पुरानी पेंशन लागू करना है।
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सालों की सेवा के बाद दोबारा परीक्षा क्यों?
अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारी भारत भार्गव ने सरकार के फैसले पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 1998 या उसके बाद नियुक्त हुए जो शिक्षक सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनसे अब दोबारा पात्रता परीक्षा लेना पूरी तरह अनुचित है। भार्गव ने स्पष्ट किया कि इन शिक्षकों की नियुक्ति D.Ed.-B.Ed. जैसी निर्धारित योग्यताओं के आधार पर ही हुई थी। शिक्षक परीक्षा से डर नहीं रहे हैं, बल्कि सालों के अनुभव के बाद इस तरह की बाध्यता का विरोध कर रहे हैं। कई शिक्षक अपनी सेवा के अंतिम चरण में हैं, ऐसे में उनसे परीक्षा लेना अव्यावहारिक है।
वेतन और वरिष्ठता में भी विसंगतियों का आरोप
भार्गव ने शिक्षकों की अन्य समस्याओं को भी उठाया: उन्होंने दावा किया कि शिक्षकों को 10 साल का छठा वेतनमान और करीब ढाई साल का सातवां वेतनमान नहीं दिया गया है। भार्गव ने अपना ही उदाहरण देते हुए बताया कि 1998 में नियुक्ति के बाद उनकी 28 साल की सेवा हो चुकी है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर इसे केवल 8 साल दिखाया जा रहा है। शिक्षक लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उनकी सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से की जाए, क्योंकि इसका सीधा असर उनके वेतन, पदोन्नति और पेंशन पर पड़ता है।
पुरानी पेंशन (OPS) की मांग पर सरकार से सवाल
धरने में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग भी जोर-शोर से उठी। शिक्षकों ने सवाल किया कि जब सांसदों और विधायकों को आजीवन पेंशन, वेतन और भत्ते मिलते हैं (जिसका शिक्षकों ने कभी विरोध नहीं किया), तो सालों तक अपनी सेवाएं देने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन क्यों लागू नहीं की जा सकती? गौरतलब है कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर नई पेंशन योजना (NPS) लागू है और फिलहाल पुरानी पेंशन बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
धरने में शामिल सभी शिक्षकों ने एक सुर में कहा कि वे TET की परीक्षा नहीं देंगे। शिक्षक संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सरकार TET की अनिवार्यता से राहत नहीं देती, सेवा अवधि व वरिष्ठता के मामलों को नहीं सुलझाती और उनकी लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।











