नई दिल्ली/कोलकाता, 14 जून । लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के बागी और बहुमत वाले गुट ने संसद के निचले सदन में तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल का अलग गुट बनाने की चर्चित संभावना पर आगे बढ़ने के बजाय त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआईI) में शामिल होने का फैसला किया है। सांसदों के इस गुट की अगुवाई चार बार लोकसभा सांसद रहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रही हैं।
बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर इस बारे में आधिकारिक अनुरोध किया।
बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के फैसले की पुष्टि करते हुए घोष दस्तीदार ने कहा कि हम देश के हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम करेंगे।
इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बांकुरा से तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद अरूप चक्रवर्ती ने मीडिया को बताया कि एनसीपीआई पूरे पश्चिम बंगाल में अपने दफ्तर खोलेगी।
एनसीपीआई 2022 में बनी थी। पार्टी के ऑफिस असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में हैं। कोलकाता से सटे हावड़ा जिले के बांकरा में भी इसका एक ऑफिस है। बागी सांसदों ने इस कम जानी-पहचानी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है।
इससे पहले, बागी सांसदों ने संकेत दिया था कि वे लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के अंदर एक अलग गुट बनाएंगे, जैसा पश्चिम बंगाल विधानसभा में किया गया था, और उसके बाद एनडीए से समर्थन की अपील करेंगे।
हालांकि, रविवार को इन घटनाक्रमों के बीच, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर आग्रह किया कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर किसी भी नए गुट को मान्यता न दी जाए। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी के चुने हुए सांसद उस पार्टी के नीतिगत फैसलों से अलग होकर काम नहीं कर सकते, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसके बाद, पार्टी के बागी गुट के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और एनसीपीआई में शामिल होने और एनडीए का समर्थन करने के अपने फैसले के बारे में एक प्रस्ताव सौंपा।














