कटनी, प्रवीण तिवारी। मध्यप्रदेश के विंध्य और महाकौशल अंचल के लिए ऐतिहासिक महत्व रखने वाली स्लीमनाबाद भूमिगत सिंचाई जल सुरंग परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले में परियोजना का निरीक्षण कर टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के कार्य की प्रतीकात्मक समाप्ति के साथ टनल निर्माण पूर्ण होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को नई मजबूती देगी तथा आने वाले वर्षों में लाखों किसानों के जीवन में समृद्धि का नया अध्याय लिखेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2008 में शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी परियोजना करीब 17 वर्षों बाद साकार होने जा रही है। देश की सबसे लंबी 11.952 किलोमीटर भूमिगत सिंचाई जल सुरंग का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना के माध्यम से नर्मदा का जल बिना बिजली और पंप के केवल गुरुत्वाकर्षण प्रणाली से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा, जो देश में इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण है।


परियोजना का 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और विश्वस्तरीय जर्मन तकनीक से निर्मित यह सुरंग कठिन भू-गर्भीय चुनौतियों के बीच तैयार की गई है। सरकार ने दिसंबर 2027 तक विस्तारित सिंचाई व्यवस्था को पूरी तरह विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।


इस परियोजना से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित छह जिलों के 1450 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी, जिससे किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी, वर्षा पर निर्भरता कम होगी और कृषि उत्पादन के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। यह परियोजना विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के साथ जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में हरित क्रांति की आधारशिला भी साबित होगी।


निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के अंतर्गत जनप्रतिनिधियों के साथ कदम सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण भी किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा जनभागीदारी से ही हरित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण संभव है।


स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना के पूरा होने के साथ विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा का अमृत जल पहुंचाने का वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है। यह परियोजना केवल सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और कृषि विकास को नई दिशा देने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।