लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का ललितपुर जिला सिर्फ अपनी सीमा के लिए नहीं बल्कि अपने राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। यह जिला लगभग पूरी तरह से मध्य प्रदेश से घिरा हुआ है। इसके पूर्व में टीकमगढ़, दक्षिण में सागर और पश्चिम में अशोकनगर-शिवपुरी जिले हैं। जिले का नाम इसके मुख्यालय शहर ललितपुर के नाम पर रखा गया है।ललितपुर जिले में दो विधानसभा क्षेत्र ललितपुर और महरौनी आते हैं और दोनों पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है।
ललितपुर विधानसभा जिले की सामान्य सीट है। यहां के वर्तमान विधायक रामरतन कुशवाहा हैं, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीतकर आए थे।
महरौनी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां से मनोहर लाल पंथ, जिन्हें मन्नू कोरी के नाम से भी जाना जाता है, विधायक हैं। वे राज्य सरकार में राज्यमंत्री भी हैं। वे 2022 में लगातार दूसरी बार इस सीट से जीते और भाजपा से ही ताल्लुक रखते हैं। यह विधानसभा क्षेत्र झांसी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है।
ललितपुर का इतिहास बहुत प्राचीन है। दुनिया के सबसे पुराने ग्रंथों में से यज्ञ पुराण, विष्णु पुराण और वराह पुराण में इसका उल्लेख मिलता है, जो लगभग 5000 साल पुराने बताए जाते हैं। रामायण और महाभारत में भी ललितपुर का जिक्र है।
मान्यता है कि राजा सुमेर सिंह ने ललितपुर शहर की स्थापना की और अपनी पत्नी ललिता के नाम पर इसका नाम ललितपुर रखा। कभी यह क्षेत्र गोंड राजाओं के कब्जे में था। सोलहवीं शताब्दी की शुरुआत में बुंदेला और उनके बेटे रुद्र प्रताप ने इसे गोंडों से जीत लिया था। बाद में यह चंदेरी के बुंदेला राज्य में शामिल हो गया।
ललितपुर जिला पहले चंदेरी राज्य का हिस्सा था, जिसकी स्थापना 17वीं सदी में बुंदेला राजपूतों ने की थी। बुंदेलखंड के साथ चंदेरी 18वीं सदी में मराठा शासन के अधीन आ गया। पड़ोसी ग्वालियर के दौलत राव सिंधिया ने 1811 में चंदेरी राज्य पर कब्जा कर लिया। 1812 में यह कर्नल बैपटिस्ट का मुख्यालय बना, जिन्हें सिंधिया ने चंदेरी का प्रबंधन करने के लिए नियुक्त किया था।
1844 में चंदेरी के पूर्व राज्य को अंग्रेजों को सौंप दिया गया और ललितपुर शहर को जिला मुख्यालय बनाकर ब्रिटिश भारत का चंदेरी जिला बनाया गया। 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों ने यह जिला खो दिया और 1858 के अंत में इसे दोबारा हासिल किया। 1861 में चंदेरी सहित बेतवा नदी के पश्चिम का हिस्सा ग्वालियर को लौटा दिया गया और बाकी हिस्से का नाम ललितपुर जिला रखा गया।
1891 में ललितपुर और झांसी जिलों को मिलाकर झांसी जिला बना दिया गया और इसे इलाहाबाद डिवीजन में शामिल कर दिया गया। प्रशासनिक सुविधा और बेहतर विकास के लिए 1 मार्च 1974 को ललितपुर को फिर से एक अलग जिला बनाया गया। यह जिला झांसी की ललितपुर और महरौनी तहसीलों को मिलाकर बना।
आज ललितपुर बुंदेलखंड की राजनीति में एक अहम स्थान रखता है, जहां इतिहास, संस्कृति और राजनीति तीनों का संगम देखने को मिलता है।














