छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है। राजनगर थाना क्षेत्र के प्रतापपुरा गांव की एक गर्भवती महिला को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण परिजन निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन यहां भी समय पर डॉक्टर और नर्स उपलब्ध नहीं होने से महिला ने अस्पताल की लिफ्ट के बाहर गैलरी में ही जुड़वा बच्चों को जन्म दे दिया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई और लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
जानकारी के अनुसार प्रतापपुरा निवासी अरुण यादव की पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने एम्बुलेंस बुलाने का प्रयास किया, लेकिन वाहन समय पर नहीं पहुंचा। मजबूरी में परिजन निजी वाहन से महिला को जिला अस्पताल लेकर आए। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टर और नर्स समय पर नहीं मिले। परिजन स्टाफ की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे, जबकि प्रसूता दर्द से तड़पती रही। इसी दौरान अस्पताल की लिफ्ट के बाहर गैलरी में महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दे दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि यदि समय पर चिकित्सा स्टाफ उपलब्ध होता तो महिला को इस तरह खुले स्थान पर प्रसव कराने की नौबत नहीं आती। विरोध बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और प्रसूता सहित दोनों नवजातों को वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कराया गया।
प्रसूता के परिजन रोहित अवस्थी ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने कई बार डॉक्टर और नर्स से मदद की गुहार लगाई, लेकिन काफी देर तक कोई भी स्वास्थ्यकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। उनका आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण महिला को गैलरी में ही बच्चों को जन्म देना पड़ा।
वहीं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने स्वीकार किया कि महिला की डिलीवरी गैलरी में हुई है। उन्होंने बताया कि नीचे से ऊपर ले जाने में कुछ परेशानी हुई थी। अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की प्रक्रिया जारी है और पूरे मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




