भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वीआईपी सरकारी आवासों के आवंटन और खाली कराने को लेकर गृह एवं संपदा विभाग ने कड़ा प्रशासनिक रुख अपना लिया है। मंत्रिमंडल से हटने के लंबे समय बाद भी राजधानी के पॉश 'बी-टाइप' सरकारी बंगलों में रह रहे तीन पूर्व मंत्रियों को बंगला खाली करने के लिए अंतिम चेतावनी (फाइनल नोटिस) जारी कर दी गई है। नियमों के मुताबिक मंत्री पद से हटने के साथ ही इन आवासों का आवंटन स्वतः रद्द हो चुका था, लेकिन लंबे समय तक आवास खाली न किए जाने पर विभाग ने अब औपचारिक बेदखली (Eviction) की कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है।
इन तीन पूर्व मंत्रियों को थमाया गया नोटिस
संपदा विभाग की ओर से जिन तीन पूर्व मंत्रियों को आवास खाली करने का अंतिम नोटिस जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- डॉ. प्रभुराम चौधरी: पूर्व स्वास्थ्य मंत्री (वर्तमान में भाजपा विधायक)
- सुश्री मीना सिंह: पूर्व जनजातीय कार्य मंत्री (वर्तमान में भाजपा विधायक)
- अरविंद भदौरिया: पूर्व सहकारिता मंत्री (विधानसभा चुनाव में पराजित, वर्तमान में पूर्व विधायक)
विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये बंगले सरकार में कैबिनेट अथवा राज्य मंत्रियों के आधिकारिक उपयोग के लिए आरक्षित होते हैं। संबंधित नेताओं का मंत्री पद का कार्यकाल समाप्त होते ही नियमों के तहत आवंटन निरस्त किया जा चुका था।
समय-सीमा में बंगला खाली न करने पर होगी जबरन बेदखली
संपदा विभाग द्वारा जारी नोटिस में एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित करते हुए स्पष्ट किया गया है कि यदि दी गई अवधि के भीतर आवास स्वेच्छा से खाली नहीं किए गए, तो प्रशासन पुलिस बल और संबंधित नियमों के तहत जबरन बेदखली की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
नए मंत्रियों के आवंटन में आ रही थी अड़चन
राजधानी भोपाल में मंत्रियों और संवैधानिक पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों के लिए बी-टाइप सरकारी आवासों की संख्या सीमित है। वर्तमान सरकार के कई नए मंत्रियों और अन्य पात्र जनप्रतिनिधियों को आधिकारिक आवास आवंटित करने के लिए पुराने बंगलों का खाली होना बेहद आवश्यक है। पुराने आवंटियों द्वारा बंगले खाली न किए जाने से नए मंत्रियों के आवास आवंटन की प्रक्रिया बाधित हो रही थी, जिसके चलते विभाग को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है। संपदा विभाग की इस कार्रवाई के बाद भोपाल के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।




