भोपाल। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से अपने सात प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इन नई नियुक्तियों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे मजबूत दिखी है, जहां प्रदेश के दो वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मोर्चों का जिम्मा सौंपा गया है।
मध्य प्रदेश के दो दिग्गजों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा ने मध्य प्रदेश के दो प्रमुख नेताओं को केंद्रीय संगठन में अहम भूमिका दी है: गोहद से पूर्व विधायक और शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके लाल सिंह आर्य भाजपा अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अब उन्हें देश भर के किसानों को संगठन से जोड़ने के लिए किसान मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। खरगोन लोकसभा सीट से लगातार दो बार (2019 और 2024) सांसद चुने गए गजेंद्र सिंह पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान सौंपी गई है। उनके कंधों पर देश भर में अल्पसंख्यक मोर्चे के ढांचागत विस्तार की जिम्मेदारी होगी।
राष्ट्रीय मोर्चों के प्रभारियों की सूची
पार्टी द्वारा विभिन्न वर्गों को साधने के लिए घोषित सातों प्रभारियों की सूची इस प्रकार है:
- युवा मोर्चा: हरीश द्विवेदी (पूर्व सांसद, उत्तर प्रदेश)
- महिला मोर्चा: डी. पुरंदेश्वरी (वरिष्ठ नेता, आंध्र प्रदेश)
- किसान मोर्चा: लाल सिंह आर्य (पूर्व मंत्री, मध्य प्रदेश)
- अल्पसंख्यक मोर्चा: गजेंद्र सिंह पटेल (सांसद, मध्य प्रदेश)
- ST (अनुसूचित जनजाति) मोर्चा: सतीश पूनिया (वरिष्ठ नेता, राजस्थान)
- SC (अनुसूचित जाति) मोर्चा: संजय भाटिया (नेता, हरियाणा)
- OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) मोर्चा: बैजयंत पांडा (वरिष्ठ नेता, ओडिशा)
राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राज्यों की टीम बनाने की मिलेगी कमान
भाजपा नेतृत्व ने इन प्रभारियों को केवल औपचारिक पद नहीं दिए हैं, बल्कि सीधे संगठन विस्तार का जिम्मा सौंपा है। ये सभी नेता संबंधित मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों के साथ समन्वय बनाकर: राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन करेंगे। विभिन्न राज्यों के लिए प्रदेश प्रभारियों का चयन करेंगे। राज्य व जिला स्तर पर मोर्चों की मजबूत टीमों को खड़ा करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मध्य प्रदेश के दो नेताओं को किसान और अल्पसंख्यक जैसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण मोर्चों का प्रभार मिलना, प्रदेश भाजपा के लिए एक बड़ा संगठनात्मक और रणनीतिक संदेश है।




