नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति ने शुक्रवार को कर्नाटक के मैसूर में बैठक की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए उड़ान के अगले चरण, फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन इकोसिस्टम में सुधार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (आईजीआरयूए) में बदलाव पर चर्चा की।समिति को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, "पिछले 10 वर्षों में, हमने हवाई अड्डों के विकास और एयरलाइंस के लिए 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (वीजीएफ) में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। अब हम 'उड़ान' के अगले चरण के तहत 28,840 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ इस लक्ष्य को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं।"
नायडू ने कहा कि भारत का एविएशन (हवाई सेवा) क्षेत्र अब केवल प्रमुख शहरों और हवाई अड्डों के विकास तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका दायरा बढ़ रहा है। मंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उड़ान विजन से प्रेरित होकर, एविएशन क्षेत्र क्षेत्रीय विकास और समावेशी आर्थिक विकास का एक अहम जरिया बन रहा है, जिससे किसानों, निर्यातकों, व्यवसायों और समुदायों को लाभ मिल रहा है। साथ ही, भारत ड्रोन और ईवीटीओएल (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग) के माध्यम से एविएशन इनोवेशन की अगली लहर का नेतृत्व कर रहा है और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) तथा एयर कार्गो जैसे क्षेत्रों में सुधारों को आगे बढ़ा रहा है।"
समिति को 'फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन' (एफटीओ) इकोसिस्टम में किए गए सुधारों के बारे में भी जानकारी दी गई, जिनका उद्देश्य सुरक्षा और प्रशिक्षण के उच्च मानकों को बनाए रखते हुए प्रशिक्षित पायलटों की उपलब्धता बढ़ाना है।
एफटीओ इकोसिस्टम का विस्तार हुआ है; 2020 में जहां 32 एफटीओ थे, वहीं 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 41 हो गई है, और इसी दौरान फ्लाइंग बेस की संख्या 32 से बढ़कर 63 हो गई है। एफटीओ रैंकिंग फ्रेमवर्क की शुरुआत से जवाबदेही में पारदर्शिता आई है, जिससे युवाओं को अपने पायलट करियर की शुरुआत में ही सही और जानकारीपूर्ण फैसले लेने में मदद मिलती है।
एविएशन सेक्टर में मौजूद अवसरों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा, "भारतीय एयरलाइंस ने दुनिया में कहीं भी न देखे गए पैमाने पर विमानों के ऑर्डर दिए हैं। लेकिन विमानों के ऑर्डर देना कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है; इन विमानों को उड़ाने के लिए कुशल और सुरक्षा के प्रति जागरूक वर्कफोर्स (कार्यबल) की जरूरत होगी। हम भारत के एविएशन सेक्टर के विकास को आगे बढ़ाने के लिए बाहर से वर्कफोर्स नहीं मंगाना चाहते। हम उस वर्कफोर्स को यहीं भारत में प्रशिक्षित करना चाहते हैं।"




