दमोह, राजेन्द्र तिवारी। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पंजीयन कार्यालय में उस वक्त स्थिति अफरा-तफरी की बन गई जब कलेक्टर खुद भारी पुलिस बल के साथ जांच करने पहुंच गए। नजूल की जमीनों की रजिस्ट्री में हो रही गंभीर गड़बड़ियों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है। लगभग एक घंटे तक चली इस औचक जांच से पूरे रजिस्ट्रार दफ्तर में हड़कंप का माहौल बना रहा।
संपदा 2.0 और 'उर्फ' का खेल: कैसे रचा गया फर्जीवाड़े का ताना-बाना
मामले की तह में जाने पर पता चलता है कि यह पूरी गड़बड़ी संपदा 2.0 पोर्टल के जरिए नजूल जमीनों की रजिस्ट्री के दौरान की जा रही थी। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, वर्षों से नजूल भूमि पर कच्चे मकान बनाकर गुजर-बसर कर रहे असली मालिकों के नाम के साथ चालाकी से 'उर्फ' जोड़ दिया जाता था। इसके बाद सर्विस प्रोवाइडर और पंजीयन दफ्तर के कर्मचारियों की कथित साठगांठ से असली हकदारों की जमीनों को दूसरे लोगों के नाम पंजीकृत करा दिया जाता था।
कार्रवाई से जागे कई सवाल, अब जांच की आंच पर टिकीं नजरें
कलेक्टर की इस सीधी कार्रवाई ने जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था और उसमें बैठे जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। कार्रवाई के बाद अब शहर भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच पूरी होने पर इस कथित सिंडिकेट का क्या सच सामने आता है। देखने वाली बात होगी कि इस गड़बड़ी में शामिल किन अधिकारियों, कर्मचारियों और भू-माफियाओं की जिम्मेदारी तय कर उन पर प्रशासनिक व कानूनी शिकंजा कसा जाता है।














