बालाघाट, रितेश सोनी| बालाघाट जिले के दक्षिण बैहर क्षेत्र में बैगा बच्चों की लगातार मौतों के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं होने के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्राम पंचायत डाबरी का उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार है। भवन से प्लास्टर गिर रहा है, बिजली और पेयजल की सुविधा नहीं है तथा शौचालय अनुपयोगी हालत में है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां पदस्थ एएनएम को पानी के लिए करीब दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। वहीं, शौचालय की सुविधा नहीं होने से कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में 55 से अधिक बैगा बच्चों की मौतों का मामला सामने आने के बाद भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य केंद्र की हालत जर्जर, सुविधाओं का अभाव
डाबरी स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन मरम्मत की बाट जोह रहा है। दीवारों से प्लास्टर गिर रहा है और सीपेज के कारण विद्युत वायरिंग खराब होने की बात सामने आई है। केंद्र में बिजली और पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के साथ शौचालय भी उपयोग के लायक नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करना कर्मचारियों और मरीजों, दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है। सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने अब तक भवन की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए क्या कदम उठाए हैं।
दो किलोमीटर दूर से पानी लाने की मजबूरी
उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एएनएम को पीने के पानी के लिए करीब दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। शौचालय अनुपयोगी होने से दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशानी होती है। ग्रामीणों के अनुसार, बिजली नहीं होने के कारण कई बार मोमबत्ती के सहारे काम करना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक सुविधाओं का अभाव विभागीय निगरानी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सीएचओ की उपस्थिति पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
उपस्वास्थ्य केंद्र में एक एएनएम और एक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) पदस्थ बताए गए हैं। सरपंच, सचिव और ग्रामीणों के अनुसार, एएनएम नियमित रूप से ड्यूटी करती हैं, जबकि सीएचओ की नियमित उपस्थिति को लेकर शिकायतें हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सीएचओ कभी-कभार ही केंद्र पहुंचती हैं। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को उपस्थिति रजिस्टर, ओपीडी रिकॉर्ड और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरपंच की शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं
ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों द्वारा उपस्वास्थ्य केंद्र की बदहाली के साथ बिजली, पानी, सड़क और मोबाइल नेटवर्क की समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों तथा स्थानीय विधायक तक शिकायतें किए जाने की बात कही गई है। इसके बावजूद समस्याएं बरकरार रहने से ग्रामीणों में नाराजगी है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और समस्याओं के समाधान में देरी क्यों हो रही है।
225 करोड़ की घोषणा के बीच विकास कार्यों पर सवाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए 225 करोड़ रुपये की घोषणा किए जाने के बीच डाबरी की स्थिति विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पेयजल, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाएं जैसी बुनियादी जरूरतें प्राथमिकता में होनी चाहिए। केवल घोषणाओं और अधिकारियों के दौरों से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि योजनाओं का लाभ गांवों तक पहुंचना भी जरूरी है।
नौ बीएसएनएल टावर होने के बाद भी नेटवर्क की समस्या
डाबरी और आसपास के गांवों में मोबाइल सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नौ बीएसएनएल टावर स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश टावर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। मोबाइल सिग्नल नहीं मिलने के कारण लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाकर नेटवर्क तलाशना पड़ता है। कई ग्रामीणों को फोन पर बातचीत और जरूरी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है। नेटवर्क की यह समस्या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासन से संपर्क में भी बाधा बन सकती है। संबंधित विभाग को टावरों की तकनीकी स्थिति की जांच कर सेवा बहाल करनी चाहिए।
बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा जरूरी
दक्षिण बैहर में बैगा बच्चों की मौतों के मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं, कुपोषण, बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। हालांकि, प्रत्येक मृत्यु के कारणों की पुष्टि चिकित्सकीय जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही की जानी चाहिए। ऐसी घटनाओं के बाद दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित समीक्षा और निगरानी जरूरी है। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण, दवाओं की उपलब्धता, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।
अब आश्वासन नहीं, समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत
डाबरी उपस्वास्थ्य केंद्र की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल निरीक्षण कराने, जर्जर भवन की तकनीकी जांच, बिजली-पानी की व्यवस्था बहाल करने और शौचालय की मरम्मत कराने की मांग उठ रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की निष्पक्ष जांच तथा ग्राम पंचायत की लंबित शिकायतों की समीक्षा भी जरूरी है।
ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी जानी चाहिए कि समस्याओं के समाधान के लिए कौन-सा अधिकारी जिम्मेदार है और काम कब तक पूरा होगा। दक्षिण बैहर जैसे आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं केवल सरकारी योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को समय पर उपचार मिलना सुनिश्चित होना चाहिए।
















