पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में मझगांय मध्यम सिंचाई बांध परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का अनूठा विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 13वें दिन भी लगातार जारी रहा। अपनी जलमग्न होती जमीन, घर और आजीविका को बचाने तथा उचित मुआवजे व सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलनरत ग्रामीणों ने अब 'बेड़ी सत्याग्रह' का रास्ता अपनाया है। चिता आंदोलन के 13वें दिन प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ-पैरों में लोहे की प्रतीकात्मक बेड़ियां और जंजीरें बांधकर जलभराव क्षेत्र में बैठकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी।


चिता, जल और मिट्टी के बाद अब बेड़ियों से जताया रोष

जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में विस्थापित अब तक विरोध के कई दर्दनाक और प्रतीकात्मक रूप अपना चुके हैं। चिता पर लेटने, जल सत्याग्रह, मिट्टी में खुद को दबाने और गले में प्रतीकात्मक फांसी का फंदा डालने के बाद गुरुवार को आंदोलनकारियों ने बेड़ियां पहनकर विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह 'बेड़ी सत्याग्रह' इस बात का प्रतीक है कि किस तरह विकास की आड़ में गरीबों, किसानों और आदिवासियों की आवाज को जंजीरों में जकड़कर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। एक तरफ बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और गांव जलमग्न हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों परिवार अब भी न्याय और सुरक्षित छत की बाट जोह रहे हैं।


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मुआवजा अधूरा, मकान और पेड़ों के मूल्यांकन पर उठ रहे सवाल

आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकांश प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज की पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है। कई विस्थापितों के मकानों, कुओं और फलदार पेड़ों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ, जिसके चलते उनका भुगतान अटका पड़ा है। इसके अलावा जमीन के अधिग्रहण में भूमि की वास्तविक श्रेणियों की अनदेखी कर कम मुआवजा तय करने को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। विस्थापितों का सीधा आरोप है कि बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए और बिना पुनर्वास स्थल विकसित किए उनके घरों को जलसमाधि दी जा रही है।


केन-बेतवा लिंक, रुंझ और रेल परियोजना के विस्थापितों का भी उठाया मुद्दा

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने साफ किया कि यह लड़ाई सिर्फ मझगांय बांध तक सीमित नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड में विकास के नाम पर बेदखल हो रहे हर उस परिवार की है जिसे उसका हक नहीं मिला। आंदोलन में रुंझ बांध, महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना और ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन निर्माण से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल पैसों का नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की रक्षा का है। आंदोलनकारियों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि जब तक प्रत्येक विस्थापित को पूरा मुआवजा, उचित पुनर्वास और पक्का आशियाना नहीं मिल जाता, तब तक यह सत्याग्रह बिना रुके जारी रहेगा।