न्यूयॉर्क। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने लगातार बनी हुई महंगाई, कर्ज चुकाने की बढ़ती लागत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में हो रहे निवेश से जुड़े जोखिम मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अब तक जितनी मजबूती दिखाई है, वह कई लोगों की उम्मीद से बेहतर रही है।रविवार को न्यूयॉर्क सिटी में कतर इकोनॉमिक फोरम के एक विशेष कार्यक्रम में बातचीत के दौरान जॉर्जीवा ने कहा क‍ि महंगाई लगातार बनी हुई है। हमें इसके जल्द काबू में आने की उम्मीद नहीं है। इसका मतलब है कि कई केंद्रीय बैंकों को अपनी नीतियां और सख्त करनी होंगी।"

जॉर्जीवा ने कहा कि कीमतों को स्थिर रखने की कोशिशों की वजह से कर्ज चुकाना भी ज्यादा महंगा और मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकारें यह अच्छी तरह समझती हैं कि उन्हें अपने खर्च और बजट घाटे को काबू में रखने की जरूरत है, लेकिन इस दिशा में अभी पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

इसके अलावा जॉर्जीवा ने एआई में हो रहे निवेश से जुड़े संभावित आर्थिक खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया। खासतौर पर उन्होंने ज्यादा उधार लेकर निवेश करने और एक-दूसरे से जुड़ी कंपनियों के बीच घूम-फिरकर होने वाली फाइनेंसिंग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह ऐसी चीज है, जिस पर हमें ध्यान देने की जरूरत है।

एआई से जुड़ी बहुत ज्यादा उम्मीदों को लेकर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा क‍ि अगर एआई उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि इससे हमारी उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, और अगर वे उम्मीदें पूरी नहीं होतीं, तो इससे पैदा हुई निराशा पूरी व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका बन सकती है।

जॉर्जीवा ने कहा कि एआई की फाइनेंसिंग से जुड़ा जोखिम मुख्य रूप से अमेरिका में केंद्रित है, हालांकि एशिया और यूरोप की भी कई कंपनियां और दूसरे खिलाड़ी एआई की सप्लाई चेन का हिस्सा हैं।

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ के मुताबिक, जॉर्जीवा ने कहा कि अक्टूबर में जारी होने वाले आईएमएफ के वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए अनुमान में भी यह बात दिखाई देगी कि जोखिम अभी ऊंचे बने हुए हैं।

उन्होंने कहा क‍ि हमने जितने झटकों का सामना किया है, उन्हें देखते हुए अगर आर्थिक विकास दर करीब तीन प्रतिशत बनी रहती है, तो यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

जॉर्जीवा ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर ऊर्जा सप्लाई से जुड़े झटके का मुकाबला करने के लिए जिस तेजी से कदम उठाए गए, उसे देखकर उन्हें उम्मीद नजर आती है।

उन्होंने कहा क‍ि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बंटने की काफी चर्चा हो रही है और यह सच है कि दुनिया अब पहले के मुकाबले कम एकजुट है। फिर भी हम ऐसी दुनिया में रहते हैं, जहां हम एक-दूसरे पर निर्भर हैं और आपस में सहयोग करते हैं।

आखिर में जॉर्जीवा ने चेतावनी देते हुए कहा क‍ि हमें सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। जोखिम काफी ज्यादा हैं और अनिश्चितता अब नई सामान्य स्थिति बन गई है।