छतरपुर। मध्य प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना' के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले मैदानी राजस्व अमले पर जिला प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। कलेक्टर मृणाल मीना द्वारा जिले में पात्र भू-स्वामियों की निःशुल्क रजिस्ट्री के लक्ष्य को समय-सीमा में पूरा करने के सख्त निर्देशों के बावजूद प्रगति संतोषजनक न मिलने पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। इसी क्रम में छतरपुर एसडीएम राजललन बागरी ने हल्का गोरा के पटवारी की दो वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का सख्त आदेश जारी किया है, वहीं नौगांव एसडीएम जीएस पटेल ने समीक्षा बैठक के बाद न्यून प्रगति पाए जाने पर तीन पटवारियों का एक दिन का वेतन राजसात (काटने) के आदेश दिए हैं।


छतरपुर अनुभाग में की गई कार्रवाई के अनुसार, पटवारी हल्का गोरा के पटवारी रोहित नायक को अपने प्रभार के ग्राम गोरा और लहेरा में कुल 401 रजिस्ट्रियां कराने का लक्ष्य सौंपा गया था। हालांकि, प्रशासनिक समीक्षा के दौरान पाया गया कि निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध केवल 28 रजिस्ट्रियां ही कराई गई थीं। कार्य में घोर लापरवाही और न्यून प्रगति को लेकर संबंधित पटवारी से कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। पटवारी द्वारा सर्वर में तकनीकी खराबी और मोबाइल नेटवर्क की समस्या का तर्क दिया गया, जिसे एसडीएम ने असंतोषजनक और कार्य से पल्ला झाड़ने वाला माना। इसके बाद म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 10 के तहत पटवारी रोहित नायक की दो वार्षिक वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने की दंडात्मक शास्ति तत्काल प्रभाव से अधिरोपित कर दी गई।


वहीं दूसरी ओर, नौगांव अनुभाग में भी स्वामित्व योजना की जमीनी प्रगति को लेकर एसडीएम जीएस पटेल ने राजस्व अमले की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में यह बात सामने आई कि कई हल्कों में निर्देशों के बावजूद भू-स्वामियों के अधिकारों के अभिलेखों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराने में अपेक्षित रुचि नहीं ली जा रही है। कार्यों में घोर उदासीनता और अत्यंत न्यून प्रगति पाए जाने पर एसडीएम नौगांव ने तीन हल्का पटवारियों—टीला हल्का पटवारी मिथलेश खरे, गलान हल्का पटवारी जितेंद्र कुमार पटैरिया तथा परेथा हल्का पटवारी मुकेश कुमार अहिरवार का एक दिवस का वेतन राजसात करने की दंडात्मक कार्रवाई की।


जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-स्वामियों को उनके अधिकारों का कानूनी दस्तावेज (रजिस्ट्री) उपलब्ध कराने की यह शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले के सभी राजस्व अनुभागों में स्वामित्व पंजीयन कार्यों की साप्ताहिक निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने मैदानी अमले को दो टूक चेतावनी दी है कि तय समय-सीमा में निर्धारित लक्ष्य पूरे न करने वाले और शासकीय दायित्वों के प्रति उदासीनता बरतने वाले पटवारियों के खिलाफ आगे भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।