छतरपुर। छतरपुर जिले में स्थित महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (MCBU) के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग (BPES - Bachelor of Physical Education and Sports) के नियमित छात्रों और खिलाड़ियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी और लापरवाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर छात्रों ने जनसुनवाई के बाहर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया और कलेक्टर महोदय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य मांगें और शिकायतें
छात्रों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में निम्नलिखित गंभीर बिंदुओं को उठाया गया है: विश्वविद्यालय में संचालित BPES पाठ्यक्रम के अंतर्गत सभी प्रमुख खेलों का प्रायोगिक (Practical) प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेना अनिवार्य है। खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन न कराने से छात्रों के शैक्षणिक और खेल भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी वार्षिक खेल कैलेंडर में क्रमांक 17 पर हैंडबॉल (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता को आधिकारिक रूप से शामिल और स्वीकृत किया गया है।
इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन हैंडबॉल का आयोजन नहीं करवा रहा है। छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने कुलसचिव (Registrar) से इस संबंध में बात की, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। वहीं, कुलपति महोदय को अवगत कराने के बावजूद इस गंभीर विषय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। विश्वविद्यालय द्वारा कई स्वीकृत खेलों में टीमों को जिला व संभाग स्तर पर भेजा ही नहीं गया। जिन खेलों में टीमें गईं, उन्हें नियमानुसार मिलने वाला TA/DA (यात्रा व दैनिक भत्ता) नहीं दिया गया। छात्रों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना पड़ा, जो खेल शुल्क (Sports Fee) के बजट में भारी वित्तीय गड़बड़ी को दर्शाता है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने जिला प्रशासन से तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है: उच्च शिक्षा विभाग के खेल कैलेंडर के अनुसार हैंडबॉल सहित सभी स्वीकृत खेल प्रतियोगिताओं का तत्काल आयोजन सुनिश्चित किया जाए। BPES छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय को शासन और NCTE के नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए जाएं। छात्रों का बकाया TA/DA अविलंब दिलाया जाए और खेल शुल्क मद के बजट की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। शासन के आदेशों की अवहेलना करने और छात्रों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले दोषी अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

















