इंदौर। भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा में इंदौर नगर पदाधिकारियों की घोषणा को लेकर गुटबाजी चरम पर पहुँच गई है। संगठन में अध्यक्ष पद के बाद सबसे अहम माने जाने वाले महामंत्री पद को लेकर राऊ के वर्तमान विधायक मधु वर्मा और पूर्व विधायक व वरिष्ठ नेता जीतू जिराती आमने-सामने आ गए हैं। दोनों दिग्गजों के अपने-अपने समर्थकों को पद दिलाने की जिद के कारण गुरुवार को होने वाली आधिकारिक घोषणा को एन मौके पर टालना पड़ा।


राऊ भाजपा में महामंत्री पद पर वर्चस्व की जंग

सूत्रों के मुताबिक, राऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक मधु वर्मा चाहते हैं कि उनकी समर्थक बबीता कुशवाह को पिछड़ा वर्ग मोर्चा का नगर महामंत्री बनाया जाए। वहीं दूसरी ओर, पूर्व विधायक जीतू जिराती ने रवि पटवारी के नाम को पहली प्राथमिकता और रवि पांचाल को दूसरी प्राथमिकता पर रखा है। जिराती, रवि पटवारी को महामंत्री पद पर बैठाने के लिए अड़े हुए हैं।


ऐन वक्त पर विधायक की आपत्ति के बाद रुकी सूची

गुरुवार को पिछड़ा वर्ग मोर्चा के पदाधिकारियों की सूची लगभग तय मानी जा रही थी। हालांकि, जैसे ही विधायक मधु वर्मा को भनक लगी कि जीतू जिराती के समर्थक रवि की नियुक्ति की तैयारी है, उन्होंने इस पर बेहद कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।


विवाद को गहराता देख मामला नगर भाजपा के जिला प्रभारी राजेश सिंह सोलंकी तक पहुँचा। माहौल की नजाकत को भांपते हुए सोलंकी ने तुरंत प्रभाव से सूची की घोषणा रोक दी। अब महामंत्री पद का फैसला पूरी तरह से जिला प्रभारी के पाले में चला गया है कि वे किसे यह जिम्मेदारी सौंपते हैं और किसे दरकिनार करते हैं। चर्चा यह भी है कि प्रस्तावित फेहरिस्त में कुछ विवादित चेहरे भी शामिल हैं।


अध्यक्ष पद पर भी हुआ था भारी घमासान

पिछड़ा वर्ग मोर्चा में खींचतान का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले अध्यक्ष पद की नियुक्ति के दौरान भी ऐसा ही घमासान देखने को मिला था: कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय अपने समर्थक विजय बिजवा को अध्यक्ष बनाना चाहते थे। विधायक रमेश मेंदोला ने रोहित चौधरी का नाम आगे बढ़ाया था।


इसके अलावा अजीत कुशवाहा, सुभाष यादव, जीतू कुशवाहा और रघु यादव जैसे मजबूत दावेदार भी रेस में शामिल थे। उस दौरान आखिरी समय में नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने समन्वय बनाते हुए निखिल सोनी के नाम पर मुहर लगवाई थी, जिनका नाम पैनल में 7वें नंबर पर था। अब देखना होगा कि महामंत्री पद के इस ताजा विवाद को संगठन किस तरह सुलझाता है।