जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकार की स्थिरता और कथित ऑपरेशन लोटस को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मेहराज मलिक ने भाजपा पर सत्ता हासिल करने के लिए चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की नजर जम्मू-कश्मीर पर लगी हुई है और पिछले कई महीनों से सरकार गिरने की चर्चाएं चल रही थीं। मलिक ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर हुई बैठकों और कैबिनेट विस्तार के बाद पैदा हुई परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए।मेहराज मलिक ने कहा कि भाजपा जहां भी सत्ता हासिल करने की संभावना देखती है, वहां प्रयास करने से पीछे नहीं हटती। जम्मू-कश्मीर में सरकार को पर्याप्त समर्थन हासिल था। कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच सरकार को लेकर कोई तत्काल टूटने जैसी स्थिति नहीं थी। कैबिनेट विस्तार एक सामान्य प्रक्रिया थी, लेकिन इसके बाद 21 विधायकों की बैठक ने राजनीतिक घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के राजनीतिक घटनाक्रम से की।

मलिक ने आशंका जताई कि कहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस में भी पार्टी के नेतृत्व और संगठन को लेकर वैसी स्थिति पैदा न हो जाए। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अपनी पार्टी पर गर्व है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम में पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसे राजनीतिक अवसरों की तलाश में रहती है और विधायकों से संपर्क करने और उन्हें अपने पक्ष में करने में माहिर है।

आप विधायक ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कैबिनेट विस्तार जनता के हितों के बजाय अपने और पार्टी के हितों को ध्यान में रखकर किया। विधायकों की बैठक में उमर अब्दुल्ला के सामने कुछ शर्तें और मांगें रखे जाने की बात सामने आई है। मंत्रिमंडल में शामिल किए गए लोगों का चयन वास्तव में जनता के हित में हुआ या राजनीतिक और व्यक्तिगत हितों को ध्यान में रखकर किया गया। सरकार किसी की भी बने, सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आम लोगों के लिए जमीन पर क्या काम हो रहा है। उपराज्यपाल शासन और भाजपा के दौर में भी आम आदमी को राहत नहीं मिली और व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। व्यवस्था बदलने के लिए अच्छे लोगों का राजनीति में आना और सरकार में जिम्मेदारी संभालना जरूरी है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान पर मलिक ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के बजाय सरकार में रहकर सवाल उठाने चाहिए। रूहुल्लाह को जनता ने चुनकर संसद में भेजा है और जनता उनसे उम्मीद रखती है। यदि वह इस्तीफा दे देते हैं तो जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को संसद में उठाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि कम हो जाएगा। रूहुल्लाह ने यदि सरकार के सामने कोई सवाल या मांग रखी है तो उन्हें उसके जवाब के लिए सरकार के भीतर रहकर संघर्ष करना चाहिए। यदि इस्तीफा होता है तो चुनाव होने तक लंबा समय लग सकता है। ऐसे में उनका बने रहना जनता के हित में होगा। मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल के बीच निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने विधायकों की अलग बैठक को लेकर भी सवाल उठाए। मलिक ने कहा कि यदि बैठक करनी थी तो फारूक अब्दुल्ला के घर या पार्टी कार्यालय में की जा सकती थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा पहले से ही विधायकों के संपर्क में होने के दावे करती रही है और ऐसे घटनाक्रम को ऑपरेशन लोटस के नजरिए से देखा जा सकता है। भाजपा चंडीगढ़ और बिहार सहित अलग-अलग जगहों पर इस तरह की राजनीतिक कोशिशें करती रही है।

लव जिहाद की बहस पर मलिक ने कहा कि अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में आम लोगों और बड़े लोगों के लिए अलग-अलग रवैया अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आम व्यक्ति के मामले में संगठनों और राजनीतिक लोगों की ओर से विरोध तथा विवाद खड़ा किया जाता है, जबकि चर्चित हस्तियों के विवाह पर वैसी बहस नहीं होती। उन्होंने शाहरुख खान, आमिर खान का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े लोगों के मामलों में सवाल नहीं उठाए जाते, जबकि आम लोगों को निशाना बनाया जाता है। जम्मू-कश्मीर के किसी बड़े चेहरे से जुड़े ऐसे मामले पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने फिलहाल नाम लेने से इनकार किया। मलिक ने कहा कि समय आने पर वह नाम भी बताएंगे और सवाल भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत फैलाने के लिए आम लोगों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए।