पन्ना/अजयगढ़, मोहम्मद मुस्तकीम। करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन मझगांय बांध परियोजना में पहली बारिश के दौरान मेड़ में जगह-जगह दरारें और मिट्टी के कटाव की तस्वीरें सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बांध के एक हिस्से से पानी के रिसाव का भी दावा किया है। मामले को लेकर आसपास के गांवों में चिंता का माहौल है।


ग्रामीणों के मुताबिक, बांध में अभी इसकी निर्धारित क्षमता की तुलना में करीब 20 से 25 प्रतिशत पानी ही जमा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद मेड़ के कई हिस्सों में लंबी और बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। बारिश के पानी से मिट्टी का कटाव भी तेजी से होने की बात कही जा रही है। बांध के आसपास रहने वाले मझगांय और नारायण चुहा गांव के लोगों ने इन परिस्थितियों को लेकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।


सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें


ग्रामीणों ने बांध की मेड़ में दिखाई दे रही दरारों और पानी के रिसाव को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। एक स्थानीय पत्रकार द्वारा भी मौके की स्थिति और ग्रामीणों की शिकायतों को सोशल मीडिया के माध्यम से सामने लाया गया। इसके बाद संबंधित विभाग के एसडीओ द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से इन दावों को अफवाह बताया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े निर्माण कार्य से जुड़ी शिकायतों की वास्तविकता जानने के लिए अधिकारी को मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करना चाहिए था।


दरारों को भरने में जुटी मशीनें


मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद निर्माण कार्य कर रही कंपनी द्वारा बांध की मेड़ में दिखाई दे रही दरारों और कटाव वाले हिस्सों पर मिट्टी डालकर सुधार कार्य किए जाने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्रवाई सवाल उठने के बाद आनन-फानन में की जा रही है।


मीडिया टीम जब मौके पर स्थिति का जायजा लेने पहुंची तो दरारों को भरने के काम में लगी मशीन को बंद करा दिए जाने की बात भी सामने आई। इससे पूरे मामले को लेकर और सवाल खड़े हो गए हैं।


निष्पक्ष जांच की मांग


ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत वाली इस बांध परियोजना का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है। ऐसे में पहली बारिश में ही मेड़ में दरारें, कटाव और पानी के रिसाव की शिकायतें सामने आना गंभीर विषय है। ग्रामीणों ने बांध की निर्माण गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता द्वारा निर्माण कार्य से जुड़ी संभावित खामियों पर सवाल उठाना उनका अधिकार है और जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व है कि वे मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करें। ग्रामीणों ने मझगांय बांध परियोजना की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने के साथ ही शिकायतों पर मौके पर निरीक्षण किए बिना प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।