भोपाल, जीतेन्द्र यादव। राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास बसे इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा, भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा और भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर दावा किया कि प्रभावित क्षेत्रों से लिए गए पानी के नमूनों में बड़ी संख्या में बैक्टीरिया और कीटाणु पाए गए हैं।


संगठनों के अनुसार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के पीछे स्थित करीब 30 मोहल्लों से कुल 63 पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें से 45 सैंपलों में बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक कीटाणुओं की मौजूदगी मिली। इन मोहल्लों की दूरी फैक्ट्री से लगभग 200 मीटर से लेकर ढाई किलोमीटर तक बताई गई है। संगठनों का कहना है कि दूषित पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।


प्रेसवार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के दिए गए निर्देशों के बावजूद आज तक लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण हजारों परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।


संगठनों ने नगर निगम और राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों की जल आपूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, दूषित पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो तथा सभी प्रभावित मोहल्लों में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।