इंफाल। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शनिवार को समावेशी शासन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में 36 विभिन्न समुदाय रहते हैं और किसी एक समुदाय के हितों को प्राथमिकता देकर शासन नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे समझें कि समुदाय-केंद्रित विचार राज्य में एकता, शांतिपूर्ण वातावरण या आर्थिक प्रगति नहीं ला सकते।
खेमचंद सिंह ने यह बयान शनिवार को इंफाल स्थित प्रथम बटालियन मणिपुर राइफल्स परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय एकता दिवस 2026 के अवसर पर दिए।
इस दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में पटेल के अटूट प्रयासों और योगदान को याद करता है। उन्होंने आगे कहा कि इस आयोजन की शुरुआत 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई थी।
मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता पर प्रकाश डाला, जिन्होंने अहिंसा, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन सहित ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विभिन्न आंदोलनों में देश का नेतृत्व किया।
उन्होंने आगे कहा कि भारत की स्वतंत्रता के बाद, उनके प्रयासों से देश भर की रियासतों को एकजुट किया गया, जिससे राष्ट्र की एकता और अखंडता मजबूत हुई। भारत के लौह पुरुष को दी गई एक अन्य महत्वपूर्ण श्रद्धांजलि को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 31 अक्टूबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटेल के सम्मान में गुजरात में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा, 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का उद्घाटन किया था।
इस अवसर पर मणिपुर राइफल्स और पुलिस की नौ टुकड़ियों ने मार्च पास्ट में भाग लिया, जिसका नेतृत्व चौथी मणिपुर राइफल्स बटालियन (आईआरबी) के कमांडिंग ऑफिसर प्रमेश अरंबम ने किया। सरकारी नृत्य अकादमी द्वारा 'अखोइगी अपुनबा सक्तम (हमारी सामूहिक पहचान)' शीर्षक से एक नृत्य प्रस्तुति भी दी गई।
इस कार्यक्रम में गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदास सिंह, कई विधायक, मुख्य सचिव, सुरक्षा सलाहकार, डीजीपी, वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।













