चेन्नई। तमिलनाडु के नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नीति, गुरुवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पेश की जा सकती है।सरकार की तीसरी कैबिनेट बैठक में औद्योगिक प्रस्तावों और प्रशासनिक निर्णयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर मानसून के जोर पकड़ने के बीच ये चर्चाएं काफी अहम हो गई हैं, क्योंकि अधिकारी राज्य भर में बिजली कटौती से निपटने और बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। प्रस्तावित 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' नीति ऐसी सुविधाओं को बढ़ावा देगी, जो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए अक्षय ऊर्जा को स्टोर कर सकें।
अधिकारियों ने बताया कि बैटरी स्टोरेज सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में मदद कर सकता है, जिससे बिजली नेटवर्क अधिक भरोसेमंद आपूर्ति दे सकेगा।
एक कंसल्टेंसी फर्म की मदद से तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में पिछले पांच महीनों के दौरान कई बार बदलाव किए गए हैं।
टीएनईबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित ढांचे में बदलाव करने से पहले, उन्होंने गुजरात, राजस्थान और अन्य प्रमुख राज्यों में लागू की गई नीतियों का अध्ययन किया।
हालांकि इस प्रस्ताव को कैबिनेट के विचार के लिए सौंप दिया गया है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिली है।
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस नीति और इसके क्रियान्वयन को लेकर सौर और पवन ऊर्जा डेवलपर्स के साथ परामर्श किया गया है। अधिकारी ने कहा कि एक बार लागू होने के बाद, इससे नई अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवेदन करना आसान हो जाएगा।
तमिलनाडु में अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ ही स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी बढ़ गई है। सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम की स्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए ग्रिड में बिजली की मांग के साथ इनके योगदान को संतुलित करना जरूरी हो जाता है।
अक्षय ऊर्जा उत्पादकों ने इस प्रस्तावित नीति का स्वागत किया है लेकिन साथ ही डेवलपर्स पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए कुछ बदलावों की मांग भी की है। एसोसिएशन के एक सदस्य, कुमारदास ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को बीईएसएस उपकरणों के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए केंद्र सरकार से परामर्श करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि बैटरी सिस्टम की लागत बहुत अधिक है और भारत में इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता भी सीमित है।
छोटे डेवलपर्स को राहत देने के लिए, उन्होंने 5 मेगावाट या उससे कम क्षमता वाले सौर संयंत्रों को अनिवार्य बीईएसएस प्रावधानों से छूट देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे संयंत्रों से दिन के समय जो बिजली पैदा होती है, वह आमतौर पर उसी दौरान इस्तेमाल हो जाती है, इसलिए बिजली को स्टोर करने की बहुत कम गुंजाइश बचती है।
ऊर्जा और निवेश के अलावा मंत्री थेनी जिला जेल से कैदियों के भागने की घटना के मद्देनजर कानून-व्यवस्था पर भी चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा, फोरशोर एस्टेट में एक नया सचिवालय बनाने का प्रस्ताव, जिसका कड़ा विरोध हो रहा है उस पर भी गुरुवार की बैठक में चर्चा हो सकती है।















