इंदौर। मशहूर बॉलीवुड रैपर और सिंगर यो यो हनी सिंह (Yo Yo Honey Singh) के कॉन्सर्ट से जुड़े करोड़ों रुपये के मनोरंजन कर (Entertainment Tax) विवाद में इंदौर हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पूर्व में आयोजकों द्वारा वापस ली गई याचिका को रद्द करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए बहाल कर दिया है।
जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व में आयोजकों ने कोर्ट से अंतरिम राहत हासिल करते समय बकाया टैक्स व देनदारियाँ चुकाने का भरोसा (Undertaking) दिया था। ऐसे में याचिका वापस लेने से पहले यह तय किया जाना बेहद आवश्यक है कि उस दिए गए आश्वासन का पालन किया गया है या नहीं।
क्या था पूरा विवाद?
मामला 8 मार्च 2025 का है, जब इंदौर नगर निगम ने कॉन्सर्ट के आयोजकों से 50 लाख रुपये का अग्रिम मनोरंजन कर जमा कराने को कहा था। तय समय पर राशि जमा न होने पर नगर निगम की टीम ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर साउंड सिस्टम और अन्य सामान जब्त कर लिया था। इसके खिलाफ कॉन्सर्ट के आयोजकों (टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड व अन्य) ने हाईकोर्ट का रुख किया और नगर निगम की टैक्स गणना को चुनौती दी। कोर्ट ने उस समय आयोजकों को इस शर्त पर राहत दी थी कि वे सामान वापस प्राप्त कर लें और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर बनने वाला टैक्स चुकाएंगे।
नगर निगम की दलील और बकाए का गणित
- आयोजकों का पक्ष: आयोजकों का तर्क था कि नगर निगम ने जीएसटी (GST) पोर्टल पर दर्ज पूरे देश के 10 शो के कुल 3.28 करोड़ रुपये के टर्नओवर को इंदौर का मानकर टैक्स की गणना कर ली। आयोजकों के अनुसार, इंदौर में टिकटों की वास्तविक बिक्री केवल ₹78,47,637 हुई थी, जिस पर 10 प्रतिशत की दर से ₹7,84,764 का मनोरंजन कर बनता था।
- नगर निगम का पक्ष: निगम का कहना था कि आयोजकों द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की ऑडिट रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें कुल ₹3,52,61,923 (3 करोड़ 52 लाख 61 हजार 923 रुपये) पर टैक्स का निर्धारण होना था। लेकिन इससे पहले कि टैक्स की वसूली होती, आयोजकों ने 17 नवंबर 2025 को याचिका वापस लेने का आवेदन देकर मामला खत्म करा लिया।
कोर्ट ने क्यों वापस लिया याचिका वापस लेने का आदेश?
नगर निगम ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर दलील दी कि आयोजकों ने अंतरिम राहत प्राप्त करने के बाद अदालत को दिए गए भरोसे का पालन नहीं किया और अचानक याचिका वापस ले ली, जिससे निगम को करोड़ों रुपये के टैक्स का नुकसान हो रहा है। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले में मेरिट के आधार पर न्यायोचित विचार होना आवश्यक है। कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 के उस आदेश को वापस ले लिया जिसके तहत याचिका वापस ली गई थी। अब इस पुरानी याचिका को बहाल करते हुए पूरे प्रकरण पर नए सिरे से सुनवाई की जाएगी।




