नई दिल्ली। जवागल श्रीनाथ का नाम भारतीय क्रिकेट के उन तेज गेंदबाजों में शामिल है जिन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर लंबे समय तक खेला और बड़ी लोकप्रियता हासिल की। श्रीनाथ को 'मैसूर एक्सप्रेस' के नाम से भी जाना जाता है।

श्रीनाथ का जन्म 31 अगस्त 1969 को मैसूर, कर्नाटक में हुआ था। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज श्रीनाथ बतौर तेज गेंदबाज भारतीय क्रिकेट में कपिल देव के बाद सबसे बड़ा चेहरा थे और कपिल के संन्यास के बाद भारतीय गेंदबाजी की अगुआई की। श्रीनाथ अपनी गति, स्विंग और धीमी गेंदों के बेहतरीन मिश्रण की बदौलत विपक्षी बल्लेबाजों को चकमा देते थे।

1991 में डेब्यू करने वाले जवागल श्रीनाथ को 1997 में इंजरी हुई थी। इस वजह से उन्हें लगभग पूरे साल क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था। ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि शायद ही उनकी वापसी हो, लेकिन श्रीनाथ न सिर्फ लौटे बल्कि 1998, उनके करियर का श्रेष्ठ वर्ष रहा। इंजरी ने उनकी गति को प्रभावित किया था, लेकिन विकेट लेने की क्षमता उनकी बढ़ गई थी।

श्रीनाथ ने 1999 वनडे विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ 154.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी थी। यह गेंद 2023 तक वनडे में किसी भारतीय गेंदबाज की फेंकी गई सबसे तेज गेंद थी। 2023 में श्रीलंका के खिलाफ उमरान मलिक ने 156 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से गेंद फेंक श्रीनाथ का रिकॉर्ड तोड़ा था।

एक दशक तक भारतीय तेज गेंदबाजी का प्रमुख चेहरा रहे श्रीनाथ 2002 में श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की विजेता रही भारतीय टीम के सदस्य थे। 2003 वनडे विश्व कप में भारतीय टीम को फाइनल में पहुंचाने में श्रीनाथ का अहम योगदान था। इस विश्व कप में उनके खेलने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। श्रीनाथ ने 2003 विश्व कप से पहले संन्यास ले लिया था, लेकिन तब भारतीय टीम के कप्तान रहे सौरव गांगुली उन्हें वापस लेकर आए। वापसी के बाद श्रीनाथ ने विश्व कप में दमदार प्रदर्शन किया और 11 मैचों में 16 विकेट लिए। जवागल श्रीनाथ ने भारत के लिए 4 वनडे विश्व कप (1992, 1996, 1999, 2003) खेले। 2003 विश्व कप के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

श्रीनाथ वनडे क्रिकेट में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज हैं और अनिल कुंबले के बाद दूसरे सबसे सफल गेंदबाज हैं। वह 300 वनडे विकेट लेने वाले भी एकमात्र भारतीय तेज गेंदबाज हैं। अपने 12 साल के करियर में श्रीनाथ ने 229 वनडे में 315 विकेट लिए। इसके अलावा, 67 टेस्ट मैचों में 236 विकेट उनके नाम हैं।

संन्यास के बाद जवागल श्रीनाथ ने कमेंट्री और कोचिंग की जगह पेशे के रूप में रेफरी बनना चुना। मौजूदा समय में वह आईसीसी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित रेफरी हैं।

1999 में श्रीनाथ को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।