गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर इंडिया 'ब्लॉक' की मॉक पार्लियामेंट की कार्यवाही को लेकर पार्टी के नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता केवल खड़गे के बरामदे पर प्रधानमंत्री बन सकते हैं।सीएम सरमा ने विपक्ष की इस प्रतीकात्मक कवायद को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी कभी भी संसद में प्रधानमंत्री का पद नहीं संभाल पाएंगे और नरेंद्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बने रहेंगे।
असम के मुख्यमंत्री ने कहा, "राहुल गांधी केवल मल्लिकार्जुन खड़गे के बरामदे में ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं। वह कभी लोकसभा में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। लोकसभा में नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बने रहेंगे।"
उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं, जब चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के कामकाज को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' ब्लॉक के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है।
31 अक्टूबर को, विपक्षी नेताओं ने नई दिल्ली में खड़गे के आवास पर एक 'नकली' संसदीय कार्यवाही आयोजित की। उन्होंने इसे मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक तरह का 'सार्वजनिक महाभियोग' बताया।
इस कार्यवाही की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की, जबकि खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया। वहीं, राहुल गांधी ने समापन भाषण दिया।
इस दौरान, विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर चुनावी निष्पक्षता से समझौता करने का आरोप लगाया और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को लेकर चिंता जताई।
'इंडिया' ब्लॉक का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत है। उन्होंने इस मुद्दे को भाजपा के खिलाफ अपने चल रहे राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बना लिया है।
विपक्ष की इस पहल के बाद, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली आयोजित की गई, जिसमें 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं ने 'वोट चोरी' के अपने आरोपों को दोहराया और चुनाव आयोग से अधिक जवाबदेही की मांग की।
वहीं, भाजपा ने विपक्ष के इस अभियान की आलोचना की है और सवाल उठाया है कि संसद के बाहर इस तरह की प्रतीकात्मक संसदीय कार्यवाही करने का क्या उद्देश्य है?
सत्ताधारी दल ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य सटीक मतदाता सूची सुनिश्चित करना और चुनावी पारदर्शिता को मजबूत करना है।













