जबलपुर/कटनी। करोड़ों की जमीन हड़पने, भ्रष्टाचार और गंभीर आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों में घिरीं कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने प्रकरण की प्रकृति और एफआईआर में दर्ज धाराओं की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की आगामी सुनवाई अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के मामलों की सुनवाई करने वाली रोस्टर बेंच में की जाएगी। अदालत के इस निर्णय के बाद निलंबित महिला पुलिस अधिकारी की कानूनी घेराबंदी और अधिक सख्त हो गई है।
कटनी जिले के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न प्रावधानों के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं। आरोप है कि सीएसपी पद पर रहते हुए कुठला क्षेत्र के एक चर्चित हत्या कांड में आरोपियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से चालान पेश करने में जानबूझकर देरी की गई। इसके बाद आरोपी पक्ष पर दबाव बनाकर करीब 1 से 2 करोड़ रुपये मूल्य की बहुमूल्य जमीन को महज 18-20 लाख रुपये में अपने सहयोगियों के नाम करा लिया गया। मामला प्रकाश में आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था और उनके खिलाफ एसआईटी जांच शुरू की गई थी।
हाई कोर्ट में नेहा पच्चीसिया की ओर से एफआईआर रद्द करने और अंतरिम राहत की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। हालांकि, अभियोजन पक्ष द्वारा मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं का स्पष्ट हवाला दिए जाने के बाद अदालत ने इसे संबंधित विशेष बेंच में स्थानांतरित करने का फैसला सुनाया। गौरतलब है कि जिला सत्र न्यायालय कटनी से अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद हाल ही में उनके व सह-आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं तथा पुलिस ने 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है। अब भ्रष्टाचार निवारण बेंच में सुनवाई तय होने से उनकी अग्रिम राहत पाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।




