अयोध्या। अयोध्या धाम के तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने गोमाता पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले इजरायली धर्मगुरु पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल में कोई धर्मगुरु इस तरह से कहे तो उसका डीएनए वहां की मूल संस्कृति का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। महाराज ने याद दिलाया कि हाल ही में भारतीय पायलटों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इजरायली नागरिकों को बचाया था।महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा, "इजरायल के धर्मगुरु ने बेहद आपत्तिजनक बात कही है। वह अज्ञानता, मूर्खता और बेवकूफी से भरी हुई बात है। ऐसे लोग सनातन संस्कृति को क्या जानेंगे? "गावो विश्वस्य मातरः"। मैं तो उन्हें कहना चाहूंगा कि तुम भी गोमूत्र का सेवन कर लो, तुम्हारे अंदर जो किटाणु और नकारात्मक विचार हैं, वे समाप्त हो जाएंगे। गोमूत्र स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने का काम करता है। जन-जन को निरोगी करने का काम करता है। जन-जन को सुखी, निरोग और स्वस्थ बनाने की व्यवस्था का संचार होता है।"
उन्होंने कहा कि माता का दूध हो, दही हो, गोमूत्र हो, गोबर हो, ये सभी पवित्र चीजें हैं, लेकिन वे लोग विषैले लोग हैं। वे विषपान करना जानते हैं, अमृतपान कैसे कर सकते हैं? ऐसे लोगों को आगे आने वाले दिनों में भगवान ही जवाब देंगे।
महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि जिस तरह इजरायल में घटनाएं घटीं, क्या वह भूल गया? उसके लिए तो सनातनियों ने खड़े होकर कहा था कि इजरायल भारत का दोस्त है, लेकिन वह तो नक्सलवादी सोच का व्यक्ति है। वह देशद्रोही मानसिकता का है, वह भारतीय सनातन संस्कृति का विरोधी है। ऐसे लोग नफरत फैलाने का काम करते हैं।
महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने कहा कि इजरायल के जो धर्मगुरु हैं, यह कहीं न कहीं किसी भी धर्म को नहीं मानते। यह अपने मजहब को भी नहीं मानता। जिस तरीके से हमारी गोमाता का मजाक उड़ाया गया, वह बहुत निंदनीय है। मैं आपको बता दूं कि गोमाता का मूत्र और गोबर भी औषधि के रूप में काम आता है। वह पवित्र होता है। यह इनको क्या मालूम? इनकी बुद्धि, इनकी मानसिकता और सोच आतंकवाद जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ाने वाले काम करती हैं। ये लोग स्वयं ही अराजक सोच के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा, "मैं तो कहता हूं कि ऐसे लोगों का जो पागलपन है, वह बहुत जल्द ठीक होगा। कोई नहीं कहता कि किसी के धर्म या उसकी आस्था का अपमान किया जाए।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने कहा कि इजरायल में कोई धर्मगुरु इस तरह से कहे तो निश्चित रूप से उसका डीएनए इजरायल की मूल संस्कृति का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। अभी हाल ही में जो घटनाएं हुई थीं, उनमें तमाम इजरायली नागरिकों को भारतीय पायलटों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया था, जबकि कुछ कट्टरपंथी तत्व उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से सर्वोपरि रही है और सर्वोपरि रहेगी। भारत विश्वगुरु था, विश्वगुरु है और विश्वगुरु रहेगा। भारत की संस्कृति "वसुधैव कुटुम्बकम" की संस्कृति है। पूरी दुनिया में शांति स्थापित करने का हमेशा भारत का प्रयास रहा है।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने कहा कि गोवंश और गोमाता को लेकर जिस तरह से इजरायली धर्मगुरु ने आपत्तिजनक टिप्पणी की है, वह बेहद निंदनीय है। मैं भारतीय धर्मगुरु होने के नाते मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन जन्मभूमि अयोध्या धाम से इजरायल के प्रधानमंत्री से मांग करता हूं कि जिस धर्मगुरु ने यह टिप्पणी की है, या तो वह क्षमा मांगे या उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा अष्ट कौशल महंत महंत योगानंद गिरी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार से उन्होंने गोमाता को लेकर टिप्पणी की है, वो बहुत ही निंदनीय और बेशर्मी की पराकाष्ठा को पार करती है। ये लोग क्या जानें कि गोमाता क्या होती है। गोमाता के अंदर सारे देवी-देवता का वास है। ये सनातन परंपरा को क्या जानेंगे? सनातन आज का नहीं है, जब इनके बाप-दादा और पुरखे भी नहीं होते थे, सनातन तब से है। ये आज पैदा हुए लोग सनातन पर टिप्पणी करें, ये स्वीकार्य नहीं है।
















