नई दिल्ली। अमेरिका के रूस से जुड़े टैरिफ और प्रतिबंधों से संबंधित उपायों में रूसी मूल के तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों को छूट देने के फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। इससे कारोबारी विश्वास बहाल होगा और द्विपक्षीय व्यापार को गति देने में मदद मिलेगी। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई है।टाइम्स कुवैत की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश से द्विपक्षीय व्यापार को गति मिल सकती है, रोजगार को समर्थन मिल सकता है और 2030 तक भारत-अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

इस आदेश से रूस से ऊर्जा खरीद से जुड़े भारतीय निर्यात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का तत्काल खतरा कम हुआ है, जिससे कारोबारियों के बीच अनिश्चितता घटी है।

इससे कंपनियों को शिपमेंट की योजना बनाने, अनुबंधों पर बातचीत करने और अधिक विश्वास के साथ निवेश संबंधी फैसले लेने की बेहतर गुंजाइश मिलेगी।

इंजीनियरिंग उत्पादों और औद्योगिक मशीनरी का निर्यात दीर्घकालिक खरीद संबंधों, प्रतिस्पर्धी कीमतों और समय पर डिलीवरी पर निर्भर करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी आयातक अब भारतीय कंपनियों से खरीद के विकल्पों का आकलन पहले जैसी तत्काल चिंता के बिना कर सकते हैं। इससे दोनों देशों के कारोबारियों को लगातार बदलती नीतिगत अनिश्चितताओं से निपटने के बजाय व्यावसायिक अवसरों के विस्तार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि, इस छूट से टैरिफ से जुड़ी हर चुनौती खत्म नहीं होती, लेकिन इससे व्यापारिक तनाव और बढ़ने का जोखिम कम होता है। साथ ही, भारत के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजारों में से एक में व्यापार की गति फिर से बढ़ाने का अवसर मिलता है।"

अमेरिका भारत के वस्तुओं के निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है। इसमें विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और श्रम-प्रधान वस्तुएं शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका को भारत का वस्तुओं का निर्यात लगभग 86.5 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 87.3 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान टैरिफ संबंधी उपायों के बावजूद निर्यात में लगभग 0.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

सितंबर 2026 में अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़कर 8.02 अरब डॉलर हो गया, जो सितंबर 2025 के 5.42 अरब डॉलर के मुकाबले 48 प्रतिशत अधिक है।

रिपोर्ट में कहा गया, "ऊर्जा, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में बेहतर समन्वय से दोनों देश साझा हितों की पहचान कर सकते हैं और भविष्य में किसी भी तरह के व्यवधान के जोखिम को कम कर सकते हैं।"