दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस (Binance) को एक बहुत बड़े सुरक्षा सेंधमारी (Security Breach) का सामना करना पड़ा है। क्रिप्टो इंडस्ट्री के इतिहास में इसे अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल डकैती माना जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल साइबर अटैक के बाद से दुनियाभर के निवेशकों में हड़कंप मच गया है।


बड़ी बातें

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स ने 5.3 से 5.9 बिलियन डॉलर (करीब ₹50,000 करोड़) की क्रिप्टोकरेंसी उड़ाई है। सुरक्षा को देखते हुए प्लेटफॉर्म पर सभी प्रकार के डिपॉजिट (जमा) और विड्रॉल (निकासी) पर रोक लगा दी गई है। इस खबर के आते ही दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन समेत अन्य प्रमुख कॉइन्स में 5% से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाइनेंस के वैश्विक स्तर पर 30 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं, जिनमें भारत के करीब 2 से 2.5 करोड़ यूजर्स शामिल हैं।


कैसे हुई सेंधमारी और बाइनेंस ने क्या कदम उठाए?

शुरुआती तकनीकी जांच में सामने आया है कि यह हमला कंपनी के एक डेवलपर इंजीनियर के लैपटॉप के जरिए सिस्टम में घुसपैठ से जुड़ा हो सकता है। हैकर्स ने सर्विस कंटेनर तक पहुंच बनाकर अनधिकृत निकासी के ऑर्डर सबमिट किए। हालाँकि, बाइनेंस ने अपने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि उनका फंड सुरक्षित है और जांच में किसी भी यूजर का नुकसान साबित होने पर कंपनी उसकी पूरी भरपाई करेगी। कंपनी अंतरराष्ट्रीय साइबर एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर मामले की जांच कर रही है।


₹50,000 करोड़ के एसेट्स फ्रीज

फंड्स को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर ब्लॉकचेन लेवल पर कार्रवाई की गई है: बाइनेंस ने खुद लगभग $3 बिलियन के डिजिटल एसेट्स फ्रीज किए हैं। इसके अलावा, टेदर (Tether) ने $1.6 बिलियन और सर्कल (Circle) ने $800 मिलियन के एसेट्स ब्लॉक किए हैं। कुल मिलाकर $5.4 बिलियन की रकम को फ्रीज करके हैकर्स को उसे भुनाने से रोक दिया गया है।


मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह

क्रिप्टो बाजार में मचे इस भूचाल के बाद जानकारों का कहना है कि जब तक बाइनेंस की ओर से आधिकारिक 'पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट' और सुरक्षा बहाली का ऐलान नहीं किया जाता, तब तक निवेशकों को केवल आधिकारिक चैनलों के अपडेट्स पर ही भरोसा करना चाहिए।