सतना, सजल कुमार रजक। करवा चौथ पर चांद के दीदार का बेसब्री से इंतजार कर रही सुहागिनों के सामने इस बार मौसम ने बड़ा अड़ंगा लगा दिया। मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित ग्राम मुरार में अर्नब चक्रवात और घने बादलों के कारण देर रात तक चांद नजर नहीं आया। ऐसे में एक पति ने अपनी सूझबूझ और प्यार का अनोखा परिचय देते हुए शिक्षाविद 'खान सर' की एटलस (Atlas) पुस्तक में बने चांद का प्रतिबिंब पत्नी को दिखाया और उनका व्रत संपन्न कराया।

चक्रवात अर्नब का असर, आसमान में छाए रहे घने बादल बंगाल की खाड़ी से उठे अर्नब चक्रवात के प्रभाव के चलते सतना और आसपास के इलाकों में आसमान घने बादलों से घिरा रहा। देर रात तक चांद ना दिखने से निर्जला व्रत रख रहीं सुहागिनों का इंतजार बढ़ता जा रहा था। ग्राम मुरार की महिला भी करवा चौथ की परंपरा अनुसार चांद के दर्शन के लिए बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही थीं, लेकिन मौसम की मार के आगे उम्मीद धुंधली पड़ने लगी।

मुश्किल घड़ी में काम आई वैज्ञानिक सोच और खान सर की एटलस जब चांद निकलने के कोई आसार नहीं दिखे, तो पति ने वक्त रहते इस समस्या का एक व्यावहारिक और अनोखा हल निकाला। उन्होंने 'खान सर' की प्रसिद्ध ATLAS Concept & Written पुस्तक निकाली और उसमें छपे चांद के चित्र/प्रतिबिंब को पत्नी के सामने रखा। पत्नी ने उसी प्रतीकात्मक चांद का छलनी से दर्शन कर करवा चौथ की पारंपरिक रस्म पूरी की। इसके बाद पति ने पत्नी को जल पिलाकर उनका निर्जला व्रत खुलवाया।

प्रेम और सूझबूझ की अनोखी मिसाल बनी यह घटना सतना जिले के इस छोटे से गांव की यह घटना सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर यह वाकया पति-पत्नी के आपसी प्रेम और समर्पण को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर यह साबित करता है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय समझदारी और उपलब्ध संसाधनों के सही इस्तेमाल से राह निकाली जा सकती है। जब कुदरत ने चांद को छिपा लिया, तब एटलस किताब के पन्नों ने करवा चौथ की परंपरा पूरी करा दी।