जबलपुर। मध्य प्रदेश में इन दिनों आसमान से बरसती आग, भीषण गर्मी और मौसम विभाग द्वारा जारी लू (हीटवेव) के कड़े अलर्ट के बीच संस्कारधानी जबलपुर के तिलवारा घाट से आस्था और अटूट साधना की एक बेहद हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ मां नर्मदा के पावन तट पर ४४ डिग्री के झुलसा देने वाले तापमान में एक महिला कड़कड़ाती धूप के बीच बैठकर बेहद कठिन 'अग्नि तपस्या' कर रही हैं। पावन गंगा दशहरा के पर्व से शुरू हुई यह अलौकिक तपस्या लगातार पांच दिनों तक चलेगी, जिसके अंतर्गत वे रोज़ाना दोपहर १२ बजे से लेकर २ बजे तक, जब सूरज ठीक सिर के ऊपर होता है और गर्मी अपने चरम पर होती है, सुलगती हुई अग्नि के बीच बैठकर साधना में लीन रहती हैं। इस कठिन अनुष्ठान को करने वाली साध्वी का नाम पूजा जायसवाल है, जिनकी इस अदम्य इच्छाशक्ति और भक्ति को देखकर वहाँ पहुंचने वाले लोग दांतों तले उंगली दबा रहे हैं।


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साध्वी पूजा जायसवाल की इस साधना को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद कठिन माना जा रहा है क्योंकि वे कोई साधारण नहीं, बल्कि '२५१ कंडों' (उपलों) की धधकती अग्नि के ठीक बीच बैठकर यह तप कर रही हैं। मां नर्मदा के तिलवारा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ २५१ कंडों की अग्नि प्रज्वलित कर उसे आठ अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया गया है और साध्वी इन सुलगते हुए अग्निकुंडों के केंद्र में बैठकर अडिग भाव से तपस्यारत हैं। इस दैनिक साधना की शुरुआत बेहद नियमबद्ध तरीके से होती है, जिसमें दोपहर की तपस्या से ठीक पहले वे मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान करती हैं, जिसके बाद तट पर विशेष पूजन और मां नर्मदा की भव्य आरती की जाती है। दोपहर में ठीक दो घंटे की इस भीषण अग्नि परीक्षा को पार करने के बाद शाम के समय पुनः आरती और देर रात्रि में विशेष हवन-पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। साध्वी पूजा जायसवाल ने अपनी इस अनूठी साधना के विषय में चर्चा करते हुए बताया कि वे आदि शक्ति मां दुर्गा और गुरु गोरखनाथ बाबा की अनन्य आराधक हैं तथा उनकी इस कठिन तपस्या का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करना, देश में सुख-समृद्धि व शांति बनाए रखना और संपूर्ण मानव जाति का कल्याण करना है।


इस पूरे अनुष्ठान के पीछे उनके गुरु और सिद्ध पीठ कालीमठ मंदिर के मुख्य पुजारी महंत चंद्रशेखरआनंद का विशेष मार्गदर्शन और आशीर्वाद शामिल है। महंत चंद्रशेखरआनंद ने बताया कि साध्वी पूजा जायसवाल ने शास्त्रोक्त विधा के अनुसार उनसे विधिवत अनुमति और आज्ञा लेकर ही इस बेहद जोखिम भरे और कठिन अनुष्ठान का श्रीगणेश किया है। उन्होंने यह भी साझा किया कि साध्वी इससे पहले भी कई बार अपनी आध्यात्मिक शक्ति का परिचय दे चुकी हैं, जिसमें पिछले चैत्र नवरात्रि के दौरान उन्होंने लगातार नौ दिनों तक बिना हिले-डुले अपने पूरे शरीर पर माता की चौकी और जवारे (गेंहू के ज्वारे) बोकर कठिन व्रत रखा था। जैसे-जैसे इस अद्भुत अग्नि तपस्या की खबर जबलपुर शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में फैल रही है, वैसे-वैसे मां नर्मदा के तिलवारा घाट पर कौतूहल और श्रद्धा के साथ बड़ी संख्या में भक्तों का हुजूम उमड़ रहा है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु साध्वी की इस अदम्य साधना के साक्षात दर्शन कर रहे हैं और उनके इस दृढ संकल्प को सनातन संस्कृति की अटूट आस्था का प्रतीक मानकर नतमस्तक हो रहे हैं।